1522. कॉल करने पर क्या होता है।
@womeninsafety_itमुफ़्त, गुमनाम, दिन-रात चालू। क्या उम्मीद रखें, तब भी जब आपको समझ न आए कि क्या कहना है।
छोटे-छोटे लेख: हिंसा को कैसे पहचानें, कौन-से शब्द उसे छिपाते हैं, और उसे झेल रही महिला का सही तरीके से साथ कैसे दें।
मुफ़्त, गुमनाम, दिन-रात चालू। क्या उम्मीद रखें, तब भी जब आपको समझ न आए कि क्या कहना है।
खतरे के ऐसे संकेत जिन्हें कभी अनदेखा नहीं करना चाहिए, तब भी जब वे परवाह का रूप लेकर आते हैं।
आर्थिक हिंसा से नील नहीं पड़ते, लेकिन यह आज़ादी छीन लेती है। कमाने वाली महिलाओं से भी।
उस पर यकीन करें, साथ रहें, सहारा ढूँढने में उसकी मदद करें। अगर आपकी कोई करीबी हिंसा झेल रही है, तो क्या करें और किन बातों से बचें।
“उसने खुद मुसीबत मोल ली” से लेकर “जलन का जुनून” तक: भाषा कैसे दोष को गलत इंसान पर डाल देती है, और इसे कैसे बदलें।
जब जलन रोज़ की बात बन जाए और आपको पिंजरे में बंद-सा महसूस कराए, तो उसमें कोई रोमांस नहीं बचता।
“अगर उसे तकलीफ़ होती, तो वह छोड़कर चली गई होती।” ऐसी बातें जो हर जगह सुनाई देती हैं, और वे गलत क्यों हैं।
पासवर्ड, शेयर की गई लोकेशन, मैसेज दिखाने की माँग। डिजिटल हिंसा ऐसी माँगों से शुरू होती है जो मासूम लगती हैं।
अगर हिंसा रोकने की ज़िम्मेदारी सिर्फ़ महिलाओं पर हो, तो हिंसा नहीं रुकेगी। यह एक न्योता है, इल्ज़ाम नहीं।
बच्चे को चोट पहुँचाने के लिए उसे छूना ज़रूरी नहीं। बस उसका यह सब देखना काफ़ी है।